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Thursday, 25 February 2016
कुंभ की सफलता के लिए महाकाल मंदिर में यज्ञ
उज्जैन। सिंहस्थ की सफलता व लोक मंगल की कामना से महाकाल मंदिर में बुधवार से महारुद्र यज्ञ शुरू हुआ। सुबह संकल्प पूजन, हेमाद्री तथा पंचाग कर्म के बाद हवन कुंड में अग्नि स्थापना की गई। पश्चात ब्राह्मणों ने आहुतियां दी।
28 फरवरी तक चलने वाले अनुष्ठान में 2 लाख 19 हजार 131 आहुतियां दी जाएंगी। 3 मार्च को गणपति अथर्वशीर्ष पाठ तथा यज्ञ की पूर्णाहुति होगी। इससे पूर्व सुबह कोटितीर्थ कुंड से यज्ञ स्थल तक कलश यात्रा निकाली गई।
पश्चात यज्ञाचार्य पं. घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में सिंहस्थ केंद्रीय समिति के अध्यक्ष माखनसिंह, प्रशासक आरपी तिवारी व अर्चना तिवारी, रुड़की के महंत यतिंद्रानंद गिरीजी महाराज आदि ने मंगल कलश स्थापना तथा पूजा-अर्चना कर यज्ञ का शुभारंभ किया।
पं. आशीष पुजारी, पं. दिनेश पुजारी, पं. सत्यनारायण जोशी सहित अनेक पुजारी-पुरोहितों ने यज्ञ में आहुतियां दी। सहायक प्रशासक प्रीति चौहान ने बताया प्रतिदिन 66 पंडित यज्ञ में आहुति देंगे।
Referred By - NaiDunia
Wednesday, 24 February 2016
उज्जैन के रामघाट पर जीवंत हुआ कृष्ण काल, तीजनबाई ने जमाया रंग
Simhastha Ujjain Kumbh Mela 2016
उज्जैन। देश के ख्यात कलाकारों के जरिए देशभर में सिंहस्थ का निमंत्रण पहुंचाने की अनूठी पहल के तीसरे चरण में मंगलवार शाम रामघाट पर कृष्णकाल जीवंत हो उठा। पद्मविभूषण तीजनबाई ने पंडवानी गायन में महाभारत की व्याख्या करते हुए पांडवों की कथा सुनाई।
शिप्रा के सुरम्य तट पर तीजनबाई को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा थे। शहर के अन्य स्थानों पर भी कलाकारों ने प्रस्तुति दी। प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा 23 से 25 फरवरी तक अनुगूंज-3 का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत शहर में पांच स्थानों पर भक्ति संगीत सभाएं और प्रतिभा खोज राज्योत्सव मनाया जा रहा है।
मुख्य आयोजन रामघाट पर हुआ, यहां ख्यात लोकगायक तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ी गायन शैली पंडावनी के द्वारा खूब रंग जमाया। शास्त्रीनगर खेल मैदान पर देवास के हिमांशु का शास्त्री गायन, डॉ.विवेक बंसोड़ द्वारा पाइप हारमोनियम, कल्याणसिंह जादौन द्वारा लोक नृत्य, रामचंद्र गांगुली द्वारा लोकगीत, नीला नलवड़े का शास्त्रीय गायन तथा अनिमेष भट्ट द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति दी गई।
दशहरा मैदान पर इंदौर की शिल्पा मसूरकर ने शास्त्रीय गायन, सृष्टी बंसोड़ ने सुगम संगीत, अनुज मैसी ने उपशास्त्री गायन, छत्रपाल बिसेन ने तबला वादन, घनश्याम ग्रुप के लोकगीत सहित अन्य कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
Referred By - NayeeDuniya
Tuesday, 22 December 2015
कहानी भस्म आरती की
महाकालेश्वर मंदिर : भस्म आरती :
महाकालेश्वर मंदिर जहां प्राचीन समय में भस्म आरती पवित्र राख के साथ की जाती थी, वह राख चिता द्वारा उत्पन्न हुयी गर्म और जलती राख होती थी
ऐसा कहा जाता है कि वह राख जिससे शिवलिंग को रोज सुबह नहलाया जाता था उस समय वह एक लाश की कि होना चाहिए, जो एक दिन पहले दाह गयी हो|
हालांकि, अब लगभग 15 वर्षों के बाद से मंदिर भस्म के साथ आरती की प्रदर्शित कर रहा हे जो गाय के गोबर से बानी होती हे जिसे हम विभूति कहते है |
किंवदंती है कि जो इस अनुष्ठान में सम्मिलित होते है उनकी अकाल मृत्यु कभी नहीं होती है, सबसे बुनियादी रूप के लिए इसकी चिता पूरी तरह से माया को कम करने के लिए है: विभूति (भस्म)
इस सवाल का जवाब केवल तभी पाया जा सकता है,जब आप यह समझने की कोशिश करेंगे की शिव और नारायण माया के साथ कैसे व्यवहार करते थे| चेतना के शिखर तक पहुँचने के दो तरीके है: पहला दाहिना हाथ(मुख्य रूप से अघोरी और तांत्रिक द्वारा अपनाया जाने वाला) दूसरा बायां हाथ (वैष्णव और शिव द्वारा अपनाया जाने वाला और योग के चार रास्तों के रूप में अपनाया जाने वाला)लेकिन यह फर्क क्यों जबकि यह दोनों रस्ते हमे मोक्ष तक ले जा रहे है..?
महाकालेश्वर मंदिर जहां प्राचीन समय में भस्म आरती पवित्र राख के साथ की जाती थी, वह राख चिता द्वारा उत्पन्न हुयी गर्म और जलती राख होती थी
ऐसा कहा जाता है कि वह राख जिससे शिवलिंग को रोज सुबह नहलाया जाता था उस समय वह एक लाश की कि होना चाहिए, जो एक दिन पहले दाह गयी हो|
हालांकि, अब लगभग 15 वर्षों के बाद से मंदिर भस्म के साथ आरती की प्रदर्शित कर रहा हे जो गाय के गोबर से बानी होती हे जिसे हम विभूति कहते है |
किंवदंती है कि जो इस अनुष्ठान में सम्मिलित होते है उनकी अकाल मृत्यु कभी नहीं होती है, सबसे बुनियादी रूप के लिए इसकी चिता पूरी तरह से माया को कम करने के लिए है: विभूति (भस्म)
इस सवाल का जवाब केवल तभी पाया जा सकता है,जब आप यह समझने की कोशिश करेंगे की शिव और नारायण माया के साथ कैसे व्यवहार करते थे| चेतना के शिखर तक पहुँचने के दो तरीके है: पहला दाहिना हाथ(मुख्य रूप से अघोरी और तांत्रिक द्वारा अपनाया जाने वाला) दूसरा बायां हाथ (वैष्णव और शिव द्वारा अपनाया जाने वाला और योग के चार रास्तों के रूप में अपनाया जाने वाला)लेकिन यह फर्क क्यों जबकि यह दोनों रस्ते हमे मोक्ष तक ले जा रहे है..?
Wednesday, 16 December 2015
सिंहस्थ उज्जैन 2016

उज्जैन:
उज्जैन, मध्य प्रदेश के क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह भी इंद्रपुरी अमरावती, और अवंतिका के रूप में जाना जाता है। कई मंदिर के स्वर्ण टावरों की संख्या ज्यादा होने क कारण उज्जैन को स्वर्ण श्रृंगा के रूप से भी जाना जाता है।
उद्धार और मोक्ष के सात शहरों में से एक उज्जैन में अवंतिका नगर है, जहां 7 सागर तीर्थ, 28 तीर्थ, 84 सिद्ध लिंग, 25-30 शिव लिंग, अस्थभैरव, एकादस रुद्रस्थान,सेकड़ो देवी-देवताओ के लिए मंदिर, जलकुण्ड और स्मारक है।महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन के पवित्र शहर में हिंदुओं के सबसे शुभ मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर एक झील के पास स्थित है। इस मंदिर में विशाल दीवारों से घिरा हुआ एक बड़ा आंगन है।
SMTMC issues instructions
Discard use of polythene
Ujjain : Officials of Shri Mahakaleshwar Temple Management Committee (SMTMC) have issued strict instructions to all licensed photographers to discard the use of polythene packets otherwise disciplinary action will be taken against them.
Mahakaleshwar temple has been declared polythene free by the temple committee despite all the licensed 25 photographers of the temple were giving photographs to the devotees in polythene packets. After this issue was raised by media, officials woke up from somber sleep and directed photographers to discard the use of poly packets. Assistant administrator Priti Chauhan said that they are committed to make temple polythene free and will cancel the license if we find any photographer using poly packets.
Tuesday, 15 December 2015
Simhastha: Akhara parishad warns Madhya Pradesh govt of boycotting Shahi Snan
INDORE: Members of akhara parishad on Monday warned the state government of boycotting the holy bath in Kshipra during Simhastha 2016, if the river is not cleaned before the festival in Ujjain.
The warning came after delegation led by akhara parishad president Narendra Giri and secretary Hari Giri, reached Kshipra river in Ujjain to take stock of Simhastha 2016 preparations.
They said that chief minister Shivraj Singh Chouhan had been claiming to have linked Narmada with Kshipra river. "Is this what he has claimed? River Kshipra is in a sorry state. He only makes claims and does not specify the date when Narmada will be merged with Kshipra and the river will be cleaned," they said.
Saturday, 12 December 2015
Devotees in Simhastha with plastic Money
Devotees can visit Simhastha with plastic money
Devotees visiting Simhastha (Kumbh) Mela-2016 in Ujjain will not have to carry cash as all nationalised and private banks are making preparations to make the festive gathering a cashless event.“The banks will issue Simhastha Debit Cards. Besides, over 100 ATMs will also be established in Mela area. Not only this, nationalised and private banks would also undertake Simhastha-related publicity on their websites and invite devotees from all over the country to use their debit cards during Simhastha,” an official release said on Thursday.Thursday, 10 December 2015
Ozone to clean Kshipra for Simhastha Visitor
INDORE: Ozone gas will now used to clean and refine water in Kshipra stream for pilgrims taking a sacred plunge between Simhastha 2016.
Ujjain organization is wanting to discharge rises of ozone from the base of the waterway through pipelines to clean stream water between the celebration. The task is required to cost of Rs 9 crore. "This is likely without precedent for the nation that ozone gas will be utilized to clean water between a mammoth social affair of individuals," Ujjain divisional magistrate
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